
Polity in Hindi – भारतीय राजव्यवस्था के संपूर्ण नोट्स
भारतीय संविधान, मौलिक अधिकार, संसद, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायपालिका और महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं के Polity Notes आसान हिंदी में पढ़ें। SSC, Railway, UPSC, State PSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी।
Polity in Hindi प्रतियोगी परीक्षाओं के General Knowledge और General Studies का एक महत्वपूर्ण विषय है। भारतीय राजव्यवस्था के अंतर्गत संविधान, मौलिक अधिकार, संसद, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय, राज्य सरकार, चुनाव आयोग तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं का अध्ययन किया जाता है।
इस लेख में Indian Polity के महत्वपूर्ण नोट्स हिंदी में सरल और परीक्षा-केंद्रित तरीके से दिए गए हैं। महत्वपूर्ण अनुच्छेद, संविधान संशोधन, टेबल, Exam Points और Quick Revision की सहायता से आप भारतीय राजव्यवस्था के प्रमुख टॉपिक आसानी से समझ और दोहरा सकते हैं।
- भारतीय राजव्यवस्था क्या है?
- भारतीय संविधान
- संविधान का निर्माण
- संविधान सभा
- संविधान की प्रस्तावना
- संविधान की प्रमुख विशेषताएं
- नागरिकता
- मौलिक अधिकार
- राज्य के नीति निदेशक तत्व
- मौलिक कर्तव्य
- राष्ट्रपति
- उपराष्ट्रपति
- प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद
- भारतीय संसद
- लोकसभा
- राज्यसभा
- सर्वोच्च न्यायालय
- राज्य सरकार
- संवैधानिक संस्थाएं
- स्थानीय स्वशासन
- आपातकालीन प्रावधान
- महत्वपूर्ण संविधान संशोधन
- संविधान की अनुसूचियां
- Polity Quick Revision
- महत्वपूर्ण Polity MCQ
- FAQs
भारतीय राजव्यवस्था क्या है?
भारतीय राजव्यवस्था (Indian Polity) से आशय भारत की शासन व्यवस्था, संविधान, राजनीतिक संस्थाओं, केंद्र और राज्यों के संबंध तथा नागरिकों के अधिकार और कर्तव्यों से है।
भारतीय राजव्यवस्था का मूल आधार भारत का संविधान है। संविधान यह निर्धारित करता है कि देश का शासन किस प्रकार चलेगा, सरकार के विभिन्न अंगों की शक्तियां क्या होंगी और नागरिकों को कौन-कौन से अधिकार प्राप्त होंगे।
भारतीय संविधान
संविधान (Constitution) किसी देश की शासन व्यवस्था का मूल कानूनी ढांचा होता है। इसमें सरकार के विभिन्न अंगों की शक्तियां, उनके कार्य, नागरिकों के अधिकार तथा राज्य और नागरिकों के बीच संबंध निर्धारित किए जाते हैं।
भारतीय संविधान को संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया और यह 26 जनवरी 1950 से पूर्ण रूप से लागू हुआ।
- संविधान अंगीकृत – 26 नवंबर 1949
- संविधान लागू – 26 जनवरी 1950
- मूल संविधान में – 395 अनुच्छेद
- मूल संविधान में – 22 भाग
- मूल संविधान में – 8 अनुसूचियां
भारतीय संविधान का निर्माण
भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा (Constituent Assembly) द्वारा किया गया था। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई।
संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा थे। बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
संविधान निर्माण की महत्वपूर्ण तिथियां
| घटना | तिथि |
|---|---|
| संविधान सभा की पहली बैठक | 9 दिसंबर 1946 |
| डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए | 11 दिसंबर 1946 |
| उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत | 13 दिसंबर 1946 |
| प्रारूप समिति का गठन | 29 अगस्त 1947 |
| संविधान अंगीकृत | 26 नवंबर 1949 |
| संविधान पर सदस्यों के हस्ताक्षर | 24 जनवरी 1950 |
| संविधान लागू | 26 जनवरी 1950 |
संविधान निर्माण में कितना समय लगा?
भारतीय संविधान को तैयार करने में संविधान सभा को 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे। संविधान सभा ने इस दौरान विभिन्न समितियों, बहसों और संशोधनों के माध्यम से संविधान को अंतिम रूप दिया।
9 दिसंबर 1946 → पहली बैठक
26 नवंबर 1949 → संविधान अंगीकृत
26 जनवरी 1950 → संविधान लागू
संविधान सभा – महत्वपूर्ण तथ्य
संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के आधार पर किया गया था। इसका उद्देश्य स्वतंत्र भारत के लिए संविधान तैयार करना था।
संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं किया गया था। प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन की व्यवस्था की गई थी, जबकि रियासतों के प्रतिनिधियों के चयन की अलग व्यवस्था थी।
| पद / समिति | व्यक्ति |
|---|---|
| अस्थायी अध्यक्ष | डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा |
| स्थायी अध्यक्ष | डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
| उपाध्यक्ष | एच. सी. मुखर्जी |
| संवैधानिक सलाहकार | बी. एन. राव |
| प्रारूप समिति के अध्यक्ष | डॉ. बी. आर. आंबेडकर |
प्रारूप समिति – Drafting Committee
संविधान सभा ने 29 अगस्त 1947 को प्रारूप समिति का गठन किया। इसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर थे।
भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण डॉ. बी. आर. आंबेडकर को सामान्यतः भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार कहा जाता है।
- संविधान सभा का गठन – कैबिनेट मिशन योजना
- पहली बैठक – 9 दिसंबर 1946
- स्थायी अध्यक्ष – डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- संवैधानिक सलाहकार – बी. एन. राव
- Drafting Committee के अध्यक्ष – डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के प्रमुख स्रोत
भारतीय संविधान निर्माताओं ने विभिन्न देशों की संवैधानिक व्यवस्थाओं का अध्ययन किया और भारत की परिस्थितियों के अनुसार उपयोगी प्रावधानों को अपनाया।
| देश / स्रोत | प्रमुख प्रावधान |
|---|---|
| ब्रिटेन | संसदीय शासन, कानून का शासन, मंत्रिमंडलीय प्रणाली |
| अमेरिका | मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, राष्ट्रपति पर महाभियोग |
| आयरलैंड | राज्य के नीति निदेशक तत्व |
| कनाडा | मजबूत केंद्र वाला संघ, अवशिष्ट शक्तियां केंद्र को |
| ऑस्ट्रेलिया | समवर्ती सूची, संसद की संयुक्त बैठक |
| जर्मनी | आपातकाल के दौरान कुछ अधिकारों के निलंबन से संबंधित विचार |
| पूर्व सोवियत संघ | मौलिक कर्तव्यों की प्रेरणा |
| दक्षिण अफ्रीका | संविधान संशोधन की कुछ प्रक्रियाएं, राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन |
| भारत सरकार अधिनियम 1935 | संघीय ढांचे एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अनेक प्रावधान |
मौलिक अधिकार → अमेरिका | नीति निदेशक तत्व → आयरलैंड | संसदीय शासन → ब्रिटेन | मौलिक कर्तव्य → पूर्व सोवियत संघ
भारतीय संविधान की प्रस्तावना
प्रस्तावना (Preamble) संविधान के उद्देश्यों, आदर्शों और मूल दर्शन को व्यक्त करती है। इसकी शुरुआत “हम भारत के लोग” से होती है।
प्रस्तावना के अनुसार भारत एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है।
- न्याय – सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक
- स्वतंत्रता – विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना
- समता – प्रतिष्ठा और अवसर की
- बंधुता – व्यक्ति की गरिमा तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता
42वां संविधान संशोधन और प्रस्तावना
42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े गए।
- प्रस्तावना की शुरुआत – “हम भारत के लोग”
- प्रस्तावना का आधार – उद्देश्य प्रस्ताव
- उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया – जवाहरलाल नेहरू
- समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता – 42वें संशोधन द्वारा जोड़े गए।
भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं
भारतीय संविधान में संघीय और एकात्मक दोनों प्रकार की विशेषताएं देखने को मिलती हैं। इसके साथ संसदीय शासन, स्वतंत्र न्यायपालिका, मौलिक अधिकार और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार जैसी व्यवस्थाएं भारतीय लोकतंत्र का आधार हैं।
- विस्तृत लिखित संविधान
- संघीय व्यवस्था के साथ मजबूत केंद्र
- संसदीय शासन प्रणाली
- स्वतंत्र एवं एकीकृत न्यायपालिका
- मौलिक अधिकार
- राज्य के नीति निदेशक तत्व
- मौलिक कर्तव्य
- एकल नागरिकता
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
- धर्मनिरपेक्ष राज्य
- संविधान की सर्वोच्चता
संघीय और एकात्मक विशेषताएं
| संघीय विशेषताएं | एकात्मक झुकाव वाली विशेषताएं |
|---|---|
| केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन | मजबूत केंद्रीय सरकार |
| लिखित संविधान | एकल नागरिकता |
| संविधान की सर्वोच्चता | एकीकृत न्यायपालिका |
| स्वतंत्र न्यायपालिका | आपातकालीन प्रावधान |
| द्विसदनीय संसद | राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र द्वारा |
भारत – राज्यों का संघ
संविधान का अनुच्छेद 1 कहता है – “India, that is Bharat, shall be a Union of States.” अर्थात भारत राज्यों का संघ है।
भारत के राज्यक्षेत्र में राज्य, केंद्र शासित प्रदेश तथा ऐसे अन्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं जिन्हें भारत द्वारा विधि के अनुसार प्राप्त किया जाए।
नए राज्यों का गठन
अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्य बनाने, किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने या घटाने, उसकी सीमाओं में परिवर्तन करने अथवा नाम बदलने की शक्ति देता है।
- अनुच्छेद 1 – भारत राज्यों का संघ
- अनुच्छेद 2 – नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
- अनुच्छेद 3 – नए राज्यों का गठन तथा मौजूदा राज्यों के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन
भारतीय नागरिकता
भारतीय संविधान के भाग II में अनुच्छेद 5 से 11 तक संविधान के प्रारंभ के समय नागरिकता से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
भारत में एकल नागरिकता (Single Citizenship) की व्यवस्था है। अर्थात भारतीय नागरिकता पूरे देश के लिए एक ही है; अलग-अलग राज्यों की पृथक नागरिकता नहीं होती।
नागरिकता प्राप्त करने के प्रमुख तरीके
नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण (Naturalisation) तथा क्षेत्र के भारत में सम्मिलित होने जैसे तरीकों से प्राप्त की जा सकती है।
संविधान सभा → 9 दिसंबर 1946
Drafting Committee → 29 अगस्त 1947
संविधान अंगीकृत → 26 नवंबर 1949
संविधान लागू → 26 जनवरी 1950
Drafting Committee Chairman → डॉ. बी. आर. आंबेडकर
Constituent Assembly President → डॉ. राजेंद्र प्रसाद
नागरिकता → Part II, Articles 5–11
मौलिक अधिकार – Fundamental Rights
मौलिक अधिकार भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों और कुछ मामलों में सभी व्यक्तियों को प्रदान किए गए महत्वपूर्ण अधिकार हैं। ये व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की रक्षा करते हैं।
मौलिक अधिकार संविधान के भाग III में अनुच्छेद 12 से 35 तक दिए गए हैं।
वर्तमान में भारतीय संविधान में 6 प्रमुख मौलिक अधिकार हैं। मूल संविधान में संपत्ति का अधिकार भी मौलिक अधिकार था, जिसे बाद में इस श्रेणी से हटा दिया गया।
छह मौलिक अधिकार
| मौलिक अधिकार | अनुच्छेद |
|---|---|
| समानता का अधिकार | 14–18 |
| स्वतंत्रता का अधिकार | 19–22 |
| शोषण के विरुद्ध अधिकार | 23–24 |
| धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार | 25–28 |
| सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार | 29–30 |
| संवैधानिक उपचारों का अधिकार | 32 |
समानता का अधिकार – Articles 14 से 18
समानता का अधिकार कानून के समक्ष समानता और समान कानूनी संरक्षण के सिद्धांत को स्थापित करता है। यह अनुचित भेदभाव और कुछ सामाजिक असमानताओं के विरुद्ध संवैधानिक सुरक्षा देता है।
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 14 | कानून के समक्ष समानता और कानूनों का समान संरक्षण |
| 15 | धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध |
| 16 | लोक नियोजन में अवसर की समानता |
| 17 | अस्पृश्यता का उन्मूलन |
| 18 | उपाधियों का उन्मूलन |
- Article 14 → कानून के समक्ष समानता
- Article 17 → अस्पृश्यता का उन्मूलन
- Article 18 → उपाधियों का उन्मूलन
स्वतंत्रता का अधिकार – Articles 19 से 22
स्वतंत्रता का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। अनुच्छेद 19 भारतीय नागरिकों को छह प्रमुख स्वतंत्रताएं प्रदान करता है, हालांकि इन पर संविधान के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
Article 19 की प्रमुख स्वतंत्रताएं
- वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
- शांतिपूर्वक और बिना हथियार सभा करने की स्वतंत्रता
- संघ या संगठन बनाने की स्वतंत्रता
- भारत के राज्यक्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूमने की स्वतंत्रता
- भारत के किसी भाग में निवास और बसने की स्वतंत्रता
- कोई पेशा अपनाने या व्यापार/व्यवसाय करने की स्वतंत्रता
Article 20
अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण प्रदान करता है। इसमें पूर्वव्यापी दंड कानून से सुरक्षा, एक ही अपराध के लिए दो बार दंडित किए जाने से सुरक्षा तथा स्वयं के विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए बाध्य न किए जाने जैसी सुरक्षा शामिल हैं।
Article 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता
अनुच्छेद 21 के अनुसार किसी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है।
Article 21A – शिक्षा का अधिकार
अनुच्छेद 21A के अंतर्गत राज्य 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को कानून द्वारा निर्धारित तरीके से निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराता है।
Article 22
अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी और निरोध से संबंधित कुछ संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है तथा निवारक निरोध से संबंधित प्रावधान भी निर्धारित करता है।
शोषण के विरुद्ध अधिकार – Articles 23 और 24
Article 23
अनुच्छेद 23 मानव तस्करी, बेगार और इसी प्रकार के अन्य जबरन श्रम का निषेध करता है।
Article 24
अनुच्छेद 24 चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों या अन्य खतरनाक रोजगारों में नियोजित करने का निषेध करता है।
23 → मानव तस्करी + बेगार
24 → बाल श्रम से संवैधानिक सुरक्षा
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार – Articles 25 से 28
भारत एक पंथनिरपेक्ष राज्य है। संविधान व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा निर्धारित सीमाओं के भीतर धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है।
| अनुच्छेद | मुख्य विषय |
|---|---|
| 25 | अंतःकरण और धर्म को मानने, आचरण एवं प्रचार की स्वतंत्रता |
| 26 | धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता |
| 27 | विशिष्ट धर्म के प्रचार हेतु कर भुगतान से स्वतंत्रता |
| 28 | कुछ शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा/उपासना से संबंधित प्रावधान |
सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार – Articles 29 और 30
संविधान भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान करता है।
अनुच्छेद 29 नागरिकों के किसी वर्ग को अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 30 धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद की शैक्षणिक संस्थाएं स्थापित और प्रशासित करने का अधिकार प्रदान करता है।
संवैधानिक उपचारों का अधिकार – Article 32
यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो अनुच्छेद 32 के तहत वह सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।
डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान का “हृदय और आत्मा” कहा था।
पांच प्रमुख रिट – Writs
| रिट | सामान्य उद्देश्य |
|---|---|
| Habeas Corpus | अवैध हिरासत से व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा |
| Mandamus | लोक प्राधिकारी को वैधानिक कर्तव्य पूरा करने का आदेश |
| Prohibition | निचली अदालत/अधिकरण को अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्य करने से रोकना |
| Certiorari | निचली अदालत/अधिकरण के आदेश या कार्यवाही को निरस्त करने हेतु |
| Quo Warranto | किस अधिकार से कोई व्यक्ति सार्वजनिक पद धारण कर रहा है, इसकी जांच |
- संवैधानिक उपचार – Article 32
- Article 32 को “हृदय और आत्मा” कहा – डॉ. बी. आर. आंबेडकर
- अवैध हिरासत – Habeas Corpus
- सार्वजनिक पद की वैधता – Quo Warranto
संपत्ति का अधिकार
मूल संविधान में संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों में शामिल था। 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इसे मौलिक अधिकारों की सूची से हटा दिया गया।
अब संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 300A के तहत एक संवैधानिक अधिकार है।
संपत्ति का अधिकार → मौलिक अधिकार नहीं
Article 300A → संवैधानिक अधिकार
44वां संशोधन → मौलिक अधिकार से हटाया गया
राज्य के नीति निदेशक तत्व – DPSP
राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy) संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक दिए गए हैं।
इनका उद्देश्य राज्य को ऐसी नीतियां बनाने की दिशा देना है, जिनसे सामाजिक और आर्थिक न्याय पर आधारित कल्याणकारी राज्य की स्थापना की जा सके।
नीति निदेशक तत्व न्यायालय द्वारा सीधे लागू नहीं कराए जा सकते, लेकिन संविधान इन्हें देश के शासन में मूलभूत मानता है।
महत्वपूर्ण नीति निदेशक तत्व
| अनुच्छेद | मुख्य विषय |
|---|---|
| 39 | राज्य की नीति के कुछ सामाजिक-आर्थिक सिद्धांत |
| 39A | समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता |
| 40 | ग्राम पंचायतों का संगठन |
| 44 | समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास |
| 48A | पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा |
| 50 | न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना |
| 51 | अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा |
- Fundamental Rights – Part III
- DPSP – Part IV
- Fundamental Rights – न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय
- DPSP – सीधे न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं
मौलिक कर्तव्य – Fundamental Duties
मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग IVA में अनुच्छेद 51A के अंतर्गत दिए गए हैं।
इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। प्रारंभ में 10 मौलिक कर्तव्य थे। बाद में 86वें संविधान संशोधन द्वारा एक अतिरिक्त कर्तव्य जोड़ा गया।
वर्तमान में कुल 11 मौलिक कर्तव्य हैं।
कुछ महत्वपूर्ण मौलिक कर्तव्य
- संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना।
- भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना।
- देश की रक्षा करना और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय सेवा देना।
- सद्भाव और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना।
- प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और सुधार की भावना विकसित करना।
- सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा से दूर रहना।
- व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों में उत्कृष्टता की ओर बढ़ना।
Fundamental Rights → Part III → Articles 12–35
Right to Equality → Articles 14–18
Article 21 → जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता
Article 21A → 6–14 वर्ष की शिक्षा
Article 32 → संवैधानिक उपचार
DPSP → Part IV → Articles 36–51
Fundamental Duties → Article 51A → 11 कर्तव्य
भारत के राष्ट्रपति
राष्ट्रपति भारत के संवैधानिक राष्ट्राध्यक्ष हैं। संविधान के अनुच्छेद 52 में कहा गया है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, लेकिन संसदीय शासन प्रणाली में राष्ट्रपति सामान्यतः प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निर्वहन करते हैं।
राष्ट्रपति का निर्वाचन
राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं किया जाता। उनका निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा किया जाता है।
इसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों और दिल्ली एवं पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
राष्ट्रपति बनने की प्रमुख योग्यताएं
- भारत का नागरिक होना चाहिए।
- कम से कम 35 वर्ष की आयु होनी चाहिए।
- लोकसभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता होनी चाहिए।
- भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद धारण नहीं करना चाहिए, संवैधानिक अपवादों को छोड़कर।
राष्ट्रपति का कार्यकाल
संविधान के अनुच्छेद 56 के अनुसार राष्ट्रपति का सामान्य कार्यकाल पद ग्रहण करने की तारीख से 5 वर्ष होता है।
राष्ट्रपति पर महाभियोग
संविधान के उल्लंघन के आधार पर राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया चलाई जा सकती है। इसका प्रावधान अनुच्छेद 61 में है।
- Article 52 – भारत का राष्ट्रपति
- Article 54 – राष्ट्रपति का निर्वाचन
- Article 56 – कार्यकाल
- Article 61 – महाभियोग
- Article 72 – क्षमादान आदि की शक्ति
राष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियां
राष्ट्रपति की शक्तियों को सामान्यतः कार्यपालिका, विधायी, वित्तीय, न्यायिक, सैन्य, कूटनीतिक और आपातकालीन शक्तियों में समझा जाता है।
| शक्ति | उदाहरण |
|---|---|
| कार्यपालिका | प्रधानमंत्री की नियुक्ति तथा उनकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति |
| विधायी | संसद का सत्र बुलाना, सत्रावसान, लोकसभा भंग करना |
| वित्तीय | राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना धन विधेयक प्रस्तुत नहीं किया जा सकता |
| न्यायिक | Article 72 के तहत क्षमादान आदि |
| सैन्य | सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर |
| आपातकालीन | संवैधानिक शर्तों के तहत आपातकाल की उद्घोषणा |
अध्यादेश जारी करने की शक्ति
जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों और तत्काल कानून बनाने की आवश्यकता हो, तो संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं।
भारत के उपराष्ट्रपति
संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। राष्ट्रपति का पद रिक्त होने या राष्ट्रपति के अपने कार्यों का निर्वहन न कर पाने की स्थिति में उपराष्ट्रपति संविधान के अनुसार राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन कर सकते हैं।
उपराष्ट्रपति का निर्वाचन
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इसमें संसद के निर्वाचित और मनोनीत दोनों प्रकार के सदस्य भाग लेते हैं।
- राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।
- उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के निर्वाचित + मनोनीत सदस्य भाग लेते हैं।
- उपराष्ट्रपति – राज्यसभा के पदेन सभापति
भारत के प्रधानमंत्री
भारत की संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री सरकार के वास्तविक कार्यकारी नेतृत्व का केंद्र होते हैं।
संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करते हैं।
प्रधानमंत्री की प्रमुख भूमिका
- मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करना।
- सरकार की नीतियों और प्रशासनिक दिशा में केंद्रीय भूमिका निभाना।
- मंत्रियों के बीच विभागों के आवंटन में राष्ट्रपति को सलाह देना।
- राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच प्रमुख संवैधानिक संपर्क के रूप में कार्य करना।
- लोकसभा में सरकार का प्रमुख नेतृत्व करना, यदि प्रधानमंत्री लोकसभा सदस्य हों।
Article 78
अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति के प्रति कुछ कर्तव्यों का उल्लेख करता है। इनमें मंत्रिपरिषद के निर्णयों और प्रशासन से संबंधित जानकारी राष्ट्रपति को देना शामिल है।
मंत्रिपरिषद – Council of Ministers
संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद होती है।
अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
मंत्रियों की सामान्य श्रेणियां
| श्रेणी | सामान्य भूमिका |
|---|---|
| कैबिनेट मंत्री | प्रमुख मंत्रालयों का नेतृत्व; कैबिनेट के सदस्य |
| राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) | स्वतंत्र रूप से किसी मंत्रालय/विभाग का कार्य संभाल सकते हैं |
| राज्य मंत्री | आमतौर पर कैबिनेट मंत्री की सहायता करते हैं |
कैबिनेट और मंत्रिपरिषद में अंतर
मंत्रिपरिषद एक व्यापक निकाय है जिसमें विभिन्न श्रेणियों के मंत्री शामिल होते हैं। कैबिनेट इसका छोटा और अधिक प्रभावशाली समूह है, जो प्रमुख नीतिगत निर्णयों में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
Article 52 → राष्ट्रपति
Article 61 → राष्ट्रपति का महाभियोग
Article 63 → उपराष्ट्रपति
Vice-President → राज्यसभा के पदेन सभापति
Article 74 → राष्ट्रपति को सहायता एवं सलाह देने वाली मंत्रिपरिषद
Article 75 → प्रधानमंत्री एवं मंत्री
मंत्रिपरिषद → लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी
भारतीय संसद – Parliament of India
भारतीय संसद संघ की सर्वोच्च विधायी संस्था है। संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार संसद राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा से मिलकर बनती है।
राष्ट्रपति + राज्यसभा + लोकसभा = संसद
लोकसभा – House of the People
लोकसभा संसद का निम्न सदन है। इसके सदस्य सामान्यतः जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से चुने जाते हैं।
लोकसभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष है, लेकिन संविधान के प्रावधानों के अनुसार इसे इससे पहले भी भंग किया जा सकता है।
लोकसभा अध्यक्ष – Speaker
लोकसभा अपने सदस्यों में से अध्यक्ष (Speaker) और उपाध्यक्ष का चुनाव करती है। अध्यक्ष सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं और संसदीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Money Bill पर Speaker की भूमिका
कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इस प्रश्न पर संविधान के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है।
राज्यसभा – Council of States
राज्यसभा संसद का उच्च सदन है। यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व से संबंधित सदन है।
राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसे भंग नहीं किया जाता। इसके लगभग एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं।
राज्यसभा के सदस्य का सामान्य कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
राज्यसभा का सभापति
भारत के उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं।
राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य
संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले 12 सदस्यों को राज्यसभा के लिए मनोनीत कर सकते हैं।
लोकसभा और राज्यसभा में अंतर
| विशेषता | लोकसभा | राज्यसभा |
|---|---|---|
| स्थिति | निम्न सदन | उच्च सदन |
| प्रकृति | भंग हो सकती है | स्थायी सदन |
| सामान्य कार्यकाल | 5 वर्ष | सदस्य का 6 वर्ष |
| न्यूनतम आयु | 25 वर्ष | 30 वर्ष |
| पीठासीन अधिकारी | Speaker | Chairman |
| सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी | मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी | नहीं |
| Money Bill | केवल लोकसभा में प्रस्तुत | सिफारिशें कर सकती है |
धन विधेयक – Money Bill
संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक की परिभाषा दी गई है। धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक होती है।
लोकसभा से पारित होने के बाद धन विधेयक राज्यसभा को भेजा जाता है। राज्यसभा इसे अधिकतम 14 दिनों तक रख सकती है और अपनी सिफारिशें दे सकती है।
लोकसभा राज्यसभा की सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
- Article 110 – Money Bill
- केवल लोकसभा में प्रस्तुत
- राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक
- राज्यसभा – अधिकतम 14 दिन
- Money Bill का निर्णय – लोकसभा अध्यक्ष
संसद की संयुक्त बैठक
कुछ सामान्य विधेयकों पर दोनों सदनों के बीच गतिरोध की स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत संसद की संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है।
संयुक्त बैठक की अध्यक्षता सामान्यतः लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है।
संसदीय कार्यवाही के महत्वपूर्ण शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| Question Hour | सदस्यों द्वारा सरकार से प्रश्न पूछने का निर्धारित समय |
| Zero Hour | संसदीय परंपरा; संविधान या नियम-पुस्तिका में औपचारिक रूप से परिभाषित नहीं |
| No-Confidence Motion | लोकसभा में मंत्रिपरिषद के बहुमत समर्थन की परीक्षा |
| Adjournment | सदन की बैठक को निर्धारित समय तक स्थगित करना |
| Prorogation | संसद के सत्र का समापन |
| Dissolution | लोकसभा का विघटन |
अविश्वास प्रस्ताव
मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। इसलिए अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में लाया जाता है।
Article 79 → संसद
लोकसभा → निम्न सदन → 25 वर्ष
राज्यसभा → उच्च सदन → 30 वर्ष
राज्यसभा → स्थायी सदन
Article 108 → Joint Sitting
Article 110 → Money Bill
No-Confidence Motion → केवल लोकसभा
भारतीय न्यायपालिका
भारतीय संविधान में स्वतंत्र और एकीकृत न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है। न्यायपालिका संविधान की रक्षा, कानूनों की व्याख्या और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत में न्यायिक व्यवस्था के शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) है। इसके नीचे राज्यों के उच्च न्यायालय और फिर अधीनस्थ न्यायालय होते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय → उच्च न्यायालय → अधीनस्थ न्यायालय
भारत का सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय भारत का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है। संविधान के अनुच्छेद 124 में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और गठन का प्रावधान है।
सर्वोच्च न्यायालय ने 28 जनवरी 1950 को कार्य करना प्रारंभ किया। भारत के प्रथम मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच. जे. कानिया थे।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संविधान के प्रावधानों के अनुसार की जाती है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सामान्यतः 65 वर्ष की आयु तक पद पर रहते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार
सर्वोच्च न्यायालय को संविधान द्वारा विभिन्न प्रकार के क्षेत्राधिकार प्रदान किए गए हैं।
| क्षेत्राधिकार | मुख्य अर्थ |
|---|---|
| मूल क्षेत्राधिकार | कुछ संघीय विवाद सीधे सर्वोच्च न्यायालय में लाए जा सकते हैं |
| अपीलीय क्षेत्राधिकार | निचली अदालतों के कुछ निर्णयों के विरुद्ध अपील |
| परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार | राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित प्रश्न पर राय |
| रिट क्षेत्राधिकार | मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु रिट जारी करना |
Article 32
अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाया जा सकता है।
Article 143
अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सार्वजनिक महत्व के कानून या तथ्य से संबंधित प्रश्नों पर सर्वोच्च न्यायालय की राय मांगने की शक्ति प्रदान करता है।
न्यायिक पुनरावलोकन – Judicial Review
न्यायिक पुनरावलोकन के माध्यम से न्यायालय विधायी और कार्यपालिका कार्यों की संवैधानिकता की जांच कर सकते हैं। यदि कोई कानून संविधान के विपरीत पाया जाता है, तो सक्षम न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है।
यह व्यवस्था संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखने और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण है।
उच्च न्यायालय – High Court
संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा। संविधान संसद को दो या अधिक राज्यों अथवा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए साझा उच्च न्यायालय स्थापित करने की भी अनुमति देता है।
Article 226
उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ अन्य कानूनी उद्देश्यों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
- Supreme Court Judge Retirement → 65 वर्ष
- High Court Judge Retirement → 62 वर्ष
- Supreme Court Writ → Article 32
- High Court Writ → Article 226
जनहित याचिका – PIL
Public Interest Litigation (PIL) न्यायपालिका द्वारा विकसित एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यापक जनहित से जुड़े मामलों को न्यायालय के समक्ष उठाया जा सकता है।
PIL ने विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए न्याय तक पहुंच को आसान बनाने में भूमिका निभाई है, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से स्वयं न्यायालय तक पहुंचने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।
Article 124 → Supreme Court
SC Judge Retirement → 65 वर्ष
Article 32 → Supreme Court Writ
Article 143 → राष्ट्रपति की परामर्श शक्ति
Article 214 → High Court
HC Judge Retirement → 62 वर्ष
Article 226 → High Court Writ
राज्य सरकार – State Government
भारतीय संघीय व्यवस्था में केंद्र के साथ-साथ राज्यों में भी अलग शासन व्यवस्था होती है। राज्य स्तर पर राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका की केंद्रीय भूमिका निभाती है।
राज्यपाल – Governor
संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।
राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष है, लेकिन वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
राज्यपाल की प्रमुख शक्तियां
- मुख्यमंत्री की नियुक्ति करना।
- मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करना।
- राज्य विधानमंडल का सत्र बुलाना और सत्रावसान करना।
- विधानसभा को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार भंग करना।
- कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रखना।
- संविधान के अनुसार अध्यादेश जारी करना।
राज्यपाल की अध्यादेश शक्ति
अनुच्छेद 213 राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति से संबंधित है।
मुख्यमंत्री – Chief Minister
मुख्यमंत्री राज्य सरकार के वास्तविक कार्यकारी नेतृत्व का केंद्र होते हैं। अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है।
मुख्यमंत्री की प्रमुख भूमिका
- राज्य मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करना।
- राज्य प्रशासन और नीतियों में प्रमुख भूमिका निभाना।
- मंत्रियों के विभागों के संबंध में राज्यपाल को सलाह देना।
- राज्यपाल और मंत्रिपरिषद के बीच प्रमुख संपर्क के रूप में कार्य करना।
राज्य की मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
राज्य विधानमंडल – State Legislature
संविधान के अनुच्छेद 168 में राज्यों के विधानमंडल की व्यवस्था की गई है।
कुछ राज्यों में केवल विधानसभा होती है, जबकि कुछ राज्यों में विधानसभा के साथ विधान परिषद भी होती है।
| सदन | स्थिति |
|---|---|
| विधानसभा | निम्न सदन |
| विधान परिषद | उच्च सदन |
विधानसभा – Legislative Assembly
विधानसभा के सदस्य सामान्यतः जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव से चुने जाते हैं। विधानसभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है, यदि इसे पहले भंग न किया जाए।
विधानसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।
विधान परिषद – Legislative Council
विधान परिषद राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है और स्थायी सदन है। इसे भंग नहीं किया जाता।
इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है और लगभग एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं।
विधान परिषद सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 30 वर्ष है।
विधान परिषद का गठन या समाप्ति
संविधान के अनुच्छेद 169 के तहत संसद किसी राज्य में विधान परिषद की स्थापना या समाप्ति के लिए कानून बना सकती है, यदि संबंधित राज्य विधानसभा निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करे।
- Article 153 – राज्यपाल
- Article 161 – राज्यपाल की क्षमादान आदि की शक्ति
- Article 164 – मुख्यमंत्री एवं मंत्री
- Article 168 – राज्य विधानमंडल
- Article 169 – विधान परिषद का गठन/समाप्ति
- Article 213 – राज्यपाल की अध्यादेश शक्ति
Governor → राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त
Governor Minimum Age → 35 वर्ष
Chief Minister → राज्यपाल द्वारा नियुक्त
विधानसभा → 25 वर्ष
विधान परिषद → 30 वर्ष
विधान परिषद → स्थायी सदन
भारत की प्रमुख संवैधानिक संस्थाएं
भारतीय संविधान में अनेक स्वतंत्र संस्थाओं की व्यवस्था की गई है, जो लोकतंत्र, चुनाव, वित्तीय जवाबदेही, लोक सेवाओं और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
भारत निर्वाचन आयोग – Election Commission of India
संविधान के अनुच्छेद 324 में निर्वाचन आयोग की व्यवस्था की गई है। संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की संवैधानिक जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग को दी गई है।
निर्वाचन आयोग के प्रमुख कार्य
- निर्वाचन प्रक्रिया का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण।
- मतदाता सूचियों की तैयारी से संबंधित संवैधानिक दायित्व।
- राजनीतिक दलों के पंजीकरण से संबंधित कार्य।
- चुनाव चिह्नों से संबंधित निर्णय।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाना।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक – CAG
Comptroller and Auditor General of India (CAG) सरकारी वित्तीय जवाबदेही की एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है।
संविधान के अनुच्छेद 148 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की व्यवस्था की गई है।
CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। यह संघ और राज्यों से संबंधित खातों के ऑडिट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जैसा कि संविधान और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों में निर्धारित किया गया है।
- CAG → Article 148
- नियुक्ति → राष्ट्रपति
- मुख्य भूमिका → सार्वजनिक वित्त की लेखापरीक्षा
संघ लोक सेवा आयोग – UPSC
Union Public Service Commission (UPSC) एक संवैधानिक संस्था है। संविधान के अनुच्छेद 315 में संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों की व्यवस्था की गई है।
UPSC संघ सेवाओं से संबंधित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वित्त आयोग – Finance Commission
संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति वित्त आयोग का गठन करते हैं।
सामान्यतः प्रत्येक पांच वर्ष पर या उससे पहले आवश्यकता होने पर वित्त आयोग का गठन किया जाता है।
यह केंद्र और राज्यों के बीच करों की शुद्ध आय के वितरण तथा राज्यों को अनुदान सहायता के सिद्धांतों जैसे वित्तीय विषयों पर राष्ट्रपति को सिफारिशें देता है।
भारत के महान्यायवादी – Attorney General of India
संविधान के अनुच्छेद 76 में भारत के महान्यायवादी की व्यवस्था की गई है। महान्यायवादी भारत सरकार के सर्वोच्च विधि अधिकारी होते हैं।
उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
राज्य का महाधिवक्ता – Advocate General
संविधान के अनुच्छेद 165 में राज्य के महाधिवक्ता की व्यवस्था की गई है।
महाधिवक्ता राज्य सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है और उसकी नियुक्ति राज्यपाल करते हैं।
महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाएं – Quick Table
| संस्था / पद | अनुच्छेद |
|---|---|
| महान्यायवादी | 76 |
| CAG | 148 |
| राज्य का महाधिवक्ता | 165 |
| वित्त आयोग | 280 |
| UPSC / State PSC | 315 |
| निर्वाचन आयोग | 324 |
Article 76 → Attorney General
Article 148 → CAG
Article 165 → Advocate General
Article 280 → Finance Commission
Article 315 → UPSC
Article 324 → Election Commission
स्थानीय स्वशासन – Local Government
स्थानीय स्वशासन का उद्देश्य शासन और विकास की प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाएं और शहरी क्षेत्रों में नगरपालिकाएं स्थानीय शासन की प्रमुख संस्थाएं हैं।
पंचायती राज व्यवस्था
73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। इसके प्रावधान 24 अप्रैल 1993 से प्रभावी हुए।
संविधान में Part IX जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243 से 243-O तक पंचायतों से संबंधित प्रावधान हैं।
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था
ग्राम पंचायत → पंचायत समिति / मध्यवर्ती स्तर → जिला परिषद
संविधान में मध्यवर्ती स्तर की पंचायत से संबंधित अपवाद भी है; 20 लाख से अधिक न होने वाली जनसंख्या वाले राज्य में मध्यवर्ती स्तर की पंचायत का गठन अनिवार्य नहीं है।
ग्राम सभा – Gram Sabha
ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की आधारभूत संस्था है। सामान्य रूप से इसमें पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत गांव से संबंधित मतदाता सूची में पंजीकृत व्यक्ति शामिल होते हैं।
संविधान का अनुच्छेद 243A ग्राम सभा से संबंधित है।
पंचायतों में आरक्षण
संविधान पंचायतों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
पंचायतों में प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा भरी जाने वाली कुल सीटों में कम से कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का संवैधानिक प्रावधान है। इसमें SC/ST महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें भी शामिल हैं।
नगरपालिकाएं – Municipalities
74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक आधार दिया गया। इसके प्रमुख प्रावधान 1 जून 1993 से प्रभावी हुए।
संविधान में Part IXA जोड़ा गया। नगरपालिकाओं से संबंधित विषय 12वीं अनुसूची में दिए गए हैं।
शहरी स्थानीय निकायों के प्रमुख प्रकार
- नगर पंचायत – ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहे क्षेत्र के लिए।
- नगरपालिका परिषद – छोटे शहरी क्षेत्र के लिए।
- नगर निगम – बड़े शहरी क्षेत्र के लिए।
73वां और 74वां संशोधन – अंतर
| विशेषता | 73वां संशोधन | 74वां संशोधन |
|---|---|---|
| क्षेत्र | ग्रामीण | शहरी |
| संस्था | पंचायत | नगरपालिका |
| संविधान का भाग | Part IX | Part IXA |
| अनुसूची | 11वीं | 12वीं |
| अनुसूची में विषय | 29 | 18 |
73 → Village → Panchayat → 11th Schedule → 29 Subjects
74 → City → Municipality → 12th Schedule → 18 Subjects
राज्य निर्वाचन आयोग
पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की संवैधानिक व्यवस्था है।
पंचायत चुनावों के संदर्भ में इसका प्रमुख प्रावधान अनुच्छेद 243K में है।
73वां संशोधन → Panchayati Raj
Part IX → Panchayats
11वीं अनुसूची → 29 विषय
74वां संशोधन → Municipalities
Part IXA → Municipalities
12वीं अनुसूची → 18 विषय
भारत में आपातकालीन प्रावधान
भारतीय संविधान में असाधारण परिस्थितियों से निपटने के लिए आपातकालीन प्रावधान किए गए हैं। संविधान के भाग XVIII में आपातकाल से संबंधित प्रावधान हैं।
परीक्षा की दृष्टि से आपातकाल को मुख्यतः तीन प्रकारों में समझा जाता है – राष्ट्रीय आपातकाल, राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल।
| आपातकाल | अनुच्छेद |
|---|---|
| राष्ट्रीय आपातकाल | 352 |
| राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता | 356 |
| वित्तीय आपातकाल | 360 |
राष्ट्रीय आपातकाल – Article 352
यदि भारत या उसके किसी भाग की सुरक्षा युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से खतरे में हो, तो संविधान में निर्धारित शर्तों के तहत राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया जा सकता है।
युद्ध + बाहरी आक्रमण + सशस्त्र विद्रोह
मूल संविधान में “सशस्त्र विद्रोह” के स्थान पर “आंतरिक अशांति” शब्द था। इसे 44वें संविधान संशोधन द्वारा बदला गया।
भारत में राष्ट्रीय आपातकाल
| वर्ष | मुख्य परिस्थिति |
|---|---|
| 1962 | चीन के साथ युद्ध / बाहरी आक्रमण |
| 1971 | पाकिस्तान के साथ युद्ध / बाहरी आक्रमण |
| 1975 | तत्कालीन संवैधानिक शब्दावली के तहत आंतरिक अशांति |
राष्ट्रपति शासन – Article 356
यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हों कि किसी राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती, तो अनुच्छेद 356 के तहत उद्घोषणा की जा सकती है।
इसे सामान्यतः President’s Rule कहा जाता है।
- संबंधित है → राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता
- सामान्य नाम → President’s Rule
- राज्यपाल की रिपोर्ट इसका एक आधार हो सकती है, पर उद्घोषणा केवल उसी पर निर्भर होना आवश्यक नहीं है।
वित्तीय आपातकाल – Article 360
यदि भारत या उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा उत्पन्न हो, तो संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा की जा सकती है।
भारत में अब तक वित्तीय आपातकाल घोषित नहीं किया गया है।
Article 358 और Article 359
राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों पर प्रभाव से जुड़े प्रश्नों में अनुच्छेद 358 और 359 विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
44वें संविधान संशोधन के बाद Article 358 का प्रभाव केवल उस राष्ट्रीय आपातकाल से जुड़ा है जो युद्ध या बाहरी आक्रमण के आधार पर घोषित किया गया हो।
Article 359 के अंतर्गत राष्ट्रपति कुछ निर्दिष्ट मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए न्यायालय जाने के अधिकार को निलंबित कर सकते हैं, लेकिन Articles 20 और 21 को इससे सुरक्षित रखा गया है।
352 → National
356 → State / President’s Rule
360 → Financial
Emergency Provisions → Part XVIII
Article 352 → National Emergency
Article 356 → President’s Rule
Article 360 → Financial Emergency
Articles 20 & 21 → Article 359 के तहत सुरक्षित
महत्वपूर्ण संविधान संशोधन
भारतीय संविधान में बदलती सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार संशोधन की व्यवस्था है। संविधान संशोधन की मुख्य प्रक्रिया अनुच्छेद 368 में दी गई है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में कुछ संविधान संशोधनों से बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे सबसे महत्वपूर्ण संशोधनों को संक्षेप में दिया गया है।
प्रमुख संविधान संशोधन – Quick Table
| संशोधन | वर्ष | मुख्य विषय |
|---|---|---|
| 1वां | 1951 | अनुच्छेद 15 में विशेष प्रावधानों सहित कई परिवर्तन; नौवीं अनुसूची जोड़ी गई |
| 7वां | 1956 | राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित महत्वपूर्ण संवैधानिक परिवर्तन |
| 24वां | 1971 | संसद की संविधान संशोधन शक्ति से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट किया |
| 42वां | 1976 | प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता; मौलिक कर्तव्य सहित व्यापक परिवर्तन |
| 44वां | 1978 | आपातकाल संबंधी सुरक्षा; संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार से हटाया गया |
| 52वां | 1985 | दल-बदल विरोधी कानून; दसवीं अनुसूची |
| 61वां | 1988 | मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष |
| 73वां | 1992 | पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा |
| 74वां | 1992 | नगरपालिकाओं को संवैधानिक आधार |
| 86वां | 2002 | Article 21A; 6–14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा |
| 91वां | 2003 | मंत्रिपरिषद के आकार पर सीमा सहित दल-बदल से जुड़े परिवर्तन |
| 101वां | 2016 | GST से संबंधित संवैधानिक व्यवस्था |
| 102वां | 2018 | राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा |
| 103वां | 2019 | EWS के लिए आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान |
| 104वां | 2019 | लोकसभा/विधानसभाओं में SC/ST सीट आरक्षण की अवधि बढ़ाई; Anglo-Indian nomination समाप्त |
| 105वां | 2021 | राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी SEBC सूची से संबंधित शक्ति स्पष्ट की |
| 106वां | 2023 | लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान |
42वां संविधान संशोधन, 1976
42वां संविधान संशोधन भारतीय संविधान में किए गए सबसे व्यापक संशोधनों में से एक है। इसे अक्सर “Mini Constitution” कहा जाता है।
मुख्य तथ्य
- प्रस्तावना में समाजवादी शब्द जोड़ा गया।
- पंथनिरपेक्ष शब्द जोड़ा गया।
- अखंडता शब्द जोड़ा गया।
- मौलिक कर्तव्यों को संविधान में शामिल किया गया।
44वां संविधान संशोधन, 1978
44वें संशोधन ने विशेष रूप से आपातकालीन प्रावधानों में महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय जोड़े।
- संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार की सूची से हटाया गया।
- इसे Article 300A के तहत संवैधानिक अधिकार बनाया गया।
- Article 352 में “आंतरिक अशांति” के स्थान पर सशस्त्र विद्रोह किया गया।
- Articles 20 और 21 की सुरक्षा को मजबूत किया गया।
52वां संविधान संशोधन – Anti-Defection Law
52वें संविधान संशोधन, 1985 द्वारा दल-बदल विरोधी प्रावधान जोड़े गए और दसवीं अनुसूची संविधान में शामिल की गई।
61वां संविधान संशोधन – Voting Age
61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई।
101वां संविधान संशोधन – GST
101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 ने Goods and Services Tax (GST) के लिए संवैधानिक ढांचा प्रदान किया।
Article 279A GST Council से संबंधित है।
106वां संविधान संशोधन – महिला आरक्षण
106वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2023, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है, ने लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए लगभग एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान किया।
इसका क्रियान्वयन संविधान में निर्धारित जनगणना और परिसीमन से संबंधित प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।
42nd → Mini Constitution + Fundamental Duties
44th → Right to Property removed from Fundamental Rights
52nd → Anti-Defection
61st → Voting Age 18
73rd → Panchayats
74th → Municipalities
86th → Article 21A
101st → GST
106th → Women’s Reservation
भारतीय संविधान की अनुसूचियां
भारतीय संविधान के मूल रूप में 8 अनुसूचियां थीं। वर्तमान में संविधान में 12 अनुसूचियां हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुसूचियों से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए प्रत्येक अनुसूची के मुख्य विषय को याद रखना उपयोगी है।
| अनुसूची | मुख्य विषय |
|---|---|
| पहली | राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम एवं क्षेत्र |
| दूसरी | कुछ संवैधानिक पदाधिकारियों के वेतन, भत्ते और विशेषाधिकार |
| तीसरी | शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप |
| चौथी | राज्यसभा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सीटों का आवंटन |
| पांचवीं | अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन एवं नियंत्रण से संबंधित प्रावधान |
| छठी | असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित प्रावधान |
| सातवीं | संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची |
| आठवीं | संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाएं |
| नौवीं | Article 31B से संबंधित निर्दिष्ट कानून और विनियम |
| दसवीं | दल-बदल विरोधी प्रावधान |
| ग्यारहवीं | पंचायतों से संबंधित 29 विषय |
| बारहवीं | नगरपालिकाओं से संबंधित 18 विषय |
सातवीं अनुसूची – सबसे महत्वपूर्ण
सातवीं अनुसूची केंद्र और राज्यों के बीच विधायी विषयों के वितरण से संबंधित है।
Union List + State List + Concurrent List
- Union List – संसद के विधायी क्षेत्र के प्रमुख विषय।
- State List – सामान्यतः राज्य विधानमंडल के विधायी क्षेत्र के विषय।
- Concurrent List – संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं, संवैधानिक नियमों के अधीन।
आठवीं अनुसूची – भाषाएं
संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्तमान में 22 भाषाएं शामिल हैं।
असमिया, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु और उर्दू।
महत्वपूर्ण अनुसूचियां – Exam Revision
- 7वीं → Union, State, Concurrent Lists
- 8वीं → 22 भाषाएं
- 9वीं → Article 31B से संबंधित कानून
- 10वीं → Anti-Defection
- 11वीं → Panchayat → 29 विषय
- 12वीं → Municipality → 18 विषय
मूल संविधान → 8 अनुसूचियां
वर्तमान → 12 अनुसूचियां
7th → Three Lists
8th → 22 Languages
10th → Anti-Defection
11th → Panchayats
12th → Municipalities
Indian Polity Quick Revision in Hindi
नीचे भारतीय राजव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण तथ्यों को एक जगह दिया गया है। परीक्षा से पहले तेजी से revision करने के लिए यह section विशेष रूप से उपयोगी है।
संविधान – महत्वपूर्ण तथ्य
| संविधान सभा की पहली बैठक | 9 दिसंबर 1946 |
| Drafting Committee | 29 अगस्त 1947 |
| संविधान अंगीकृत | 26 नवंबर 1949 |
| संविधान लागू | 26 जनवरी 1950 |
| Drafting Committee Chairman | डॉ. बी. आर. आंबेडकर |
| Constituent Assembly President | डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
महत्वपूर्ण Articles
| Article | विषय |
|---|---|
| 1 | भारत अर्थात India, राज्यों का संघ |
| 14 | कानून के समक्ष समानता |
| 17 | अस्पृश्यता का उन्मूलन |
| 19 | कुछ स्वतंत्रताओं का संरक्षण |
| 21 | जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता |
| 21A | शिक्षा का अधिकार |
| 32 | संवैधानिक उपचार |
| 44 | समान नागरिक संहिता हेतु राज्य का प्रयास |
| 51A | मौलिक कर्तव्य |
| 52 | राष्ट्रपति |
| 61 | राष्ट्रपति पर महाभियोग |
| 63 | उपराष्ट्रपति |
| 74 | राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने वाली मंत्रिपरिषद |
| 76 | महान्यायवादी |
| 79 | संसद |
| 110 | Money Bill |
| 123 | राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति |
| 124 | Supreme Court |
| 148 | CAG |
| 153 | राज्यपाल |
| 168 | राज्य विधानमंडल |
| 214 | High Court |
| 280 | Finance Commission |
| 315 | Public Service Commissions |
| 324 | Election Commission |
| 352 | National Emergency |
| 356 | President’s Rule |
| 360 | Financial Emergency |
| 368 | संविधान संशोधन |
एक नजर में महत्वपूर्ण तथ्य
- Fundamental Rights → Part III
- DPSP → Part IV
- Fundamental Duties → Part IVA
- Fundamental Duties → 11
- Constitutional Schedules → 12
- Scheduled Languages → 22
- Lok Sabha Minimum Age → 25 वर्ष
- Rajya Sabha Minimum Age → 30 वर्ष
- President Minimum Age → 35 वर्ष
- Governor Minimum Age → 35 वर्ष
- Supreme Court Retirement → 65 वर्ष
- High Court Retirement → 62 वर्ष
- Voting Age → 18 वर्ष
संशोधन – One Line Revision
| 42वां | मौलिक कर्तव्य + प्रस्तावना में महत्वपूर्ण शब्द |
| 44वां | संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार से हटाया |
| 52वां | दल-बदल विरोधी कानून |
| 61वां | Voting Age → 18 |
| 73वां | Panchayati Raj |
| 74वां | Municipalities |
| 86वां | Article 21A |
| 101वां | GST |
| 106वां | महिला आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान |
Polity MCQ in Hindi – महत्वपूर्ण प्रश्न
नीचे भारतीय राजव्यवस्था से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं। ये SSC, Railway, Banking, State Exams तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उपयोगी हैं।
Q1. भारतीय संविधान कब लागू हुआ?
A. 15 अगस्त 1947
B. 26 नवंबर 1949
C. 26 जनवरी 1950
D. 2 अक्टूबर 1950
उत्तर देखें
भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
Q2. संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?
A. जवाहरलाल नेहरू
B. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
C. डॉ. बी. आर. आंबेडकर
D. सरदार पटेल
उत्तर देखें
Q3. मौलिक अधिकार संविधान के किस भाग में हैं?
A. Part II
B. Part III
C. Part IV
D. Part IVA
उत्तर देखें
मौलिक अधिकार Articles 12 से 35 तक दिए गए हैं।
Q4. संविधान का “हृदय और आत्मा” किस अनुच्छेद को कहा गया?
A. Article 14
B. Article 19
C. Article 21
D. Article 32
उत्तर देखें
डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने संवैधानिक उपचारों के अधिकार से संबंधित Article 32 को संविधान का हृदय और आत्मा कहा था।
Q5. राज्यसभा का पदेन सभापति कौन होता है?
A. राष्ट्रपति
B. प्रधानमंत्री
C. उपराष्ट्रपति
D. लोकसभा अध्यक्ष
उत्तर देखें
Q6. धन विधेयक किस सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है?
A. केवल राज्यसभा
B. केवल लोकसभा
C. किसी भी सदन में
D. संयुक्त बैठक में
उत्तर देखें
Q7. दल-बदल विरोधी प्रावधान किस अनुसूची में हैं?
A. 7वीं
B. 8वीं
C. 9वीं
D. 10वीं
उत्तर देखें
इसे 52वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया।
Q8. वित्त आयोग का उल्लेख किस अनुच्छेद में है?
A. Article 280
B. Article 315
C. Article 324
D. Article 356
उत्तर देखें
Q9. पंचायती राज से संबंधित संविधान संशोधन कौन-सा है?
A. 42वां
B. 52वां
C. 73वां
D. 74वां
उत्तर देखें
Q10. वित्तीय आपातकाल किस अनुच्छेद के तहत घोषित किया जा सकता है?
A. 352
B. 356
C. 360
D. 368
उत्तर देखें
Polity in Hindi – FAQs
Polity क्या है?
Polity का अर्थ किसी देश की शासन व्यवस्था और उससे जुड़ी राजनीतिक-संवैधानिक संस्थाओं के अध्ययन से है। Indian Polity में संविधान, संसद, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायपालिका, मौलिक अधिकार, केंद्र-राज्य संबंध और संवैधानिक संस्थाओं जैसे विषयों का अध्ययन किया जाता है।
Indian Polity की तैयारी कहां से शुरू करें?
शुरुआत संविधान निर्माण और प्रस्तावना से करें। इसके बाद मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व, मौलिक कर्तव्य, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद, न्यायपालिका, राज्य सरकार और संवैधानिक संस्थाओं को क्रम से पढ़ना उपयोगी रहता है।
भारतीय संविधान कब लागू हुआ?
भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। इसे संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया था।
भारतीय संविधान के निर्माता किसे कहा जाता है?
डॉ. बी. आर. आंबेडकर संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे और संविधान निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका के कारण उन्हें भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार कहा जाता है।
भारतीय संविधान में कितने मौलिक अधिकार हैं?
वर्तमान में छह प्रमुख मौलिक अधिकार हैं। ये संविधान के Part III में दिए गए हैं।
भारतीय संविधान में कितने मौलिक कर्तव्य हैं?
वर्तमान में 11 मौलिक कर्तव्य हैं। ये Article 51A में दिए गए हैं।
भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियां हैं?
वर्तमान में भारतीय संविधान में 12 अनुसूचियां हैं। मूल संविधान में 8 अनुसूचियां थीं।
Polity से प्रतियोगी परीक्षाओं में क्या पढ़ना चाहिए?
महत्वपूर्ण Articles, Fundamental Rights, Parliament, President, Prime Minister, Supreme Court, Governor, Constitutional Bodies, Emergency Provisions, Constitutional Amendments और Schedules पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
Polity in Hindi – Final Revision
26 Nov 1949 → संविधान अंगीकृत
26 Jan 1950 → संविधान लागू
Part III → Fundamental Rights
Part IV → DPSP
Article 51A → Fundamental Duties
Article 52 → President
Article 79 → Parliament
Article 124 → Supreme Court
Article 148 → CAG
Article 280 → Finance Commission
Article 324 → Election Commission
352 → National Emergency
356 → President’s Rule
360 → Financial Emergency
Indian Polity प्रतियोगी परीक्षाओं के सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। भारतीय संविधान की मूल अवधारणाओं को समझने के बाद मौलिक अधिकार, संसद, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायपालिका, राज्य सरकार और संवैधानिक संस्थाओं जैसे विषयों को समझना काफी आसान हो जाता है।
इस Polity in Hindi guide में भारतीय राजव्यवस्था के महत्वपूर्ण topics को आसान भाषा, tables, important Articles, exam points और quick revision के माध्यम से संक्षेप में समझाया गया है। SSC, Railway, Banking, State PSC तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी इसे revision notes के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
बेहतर तैयारी के लिए notes पढ़ने के बाद topic-wise Polity MCQ Questions in Hindi हल करें और महत्वपूर्ण Articles तथा Constitutional Amendments का नियमित revision करें।
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यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो सामान्य ज्ञान के साथ Reasoning Questions in Hindi का नियमित अभ्यास भी आवश्यक है। Coding-Decoding, Blood Relation, Direction Sense, Number Series, Analogy, Puzzle, Sitting Arrangement, Syllogism, Calendar, Clock तथा अन्य महत्वपूर्ण रीजनिंग विषयों के MCQ प्रश्नों का अभ्यास करें।
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